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फेस वार्ता। भारत भूषण शर्मा:- 

द आर्ट ऑफ लिविंग एक बहु पक्षीय, बिना किसी लाभ वाली शैक्षिक और मानवतावादी गैर सरकारी संस्था है जो 156 से ज़्यादा देशों में मौजूद है। यह संस्था श्री श्री रविशंकर द्वारा 1981 में स्थापित की गयी थी। 

आर्ट ऑफ लिविंग असंख्य, उच्च स्तर के प्रभावशाली शैक्षिक एवम् आत्म विकास कार्यक्रम कराता है। और ऐसे उपकरण प्रस्तुत करता है, जो तनाव को दूर करते हैं। ये उपकरण सभी लोगों को गहरी और अद्भुत आंतरिक शांति, प्रसन्नता और कल्याण प्रदान करते हैं।

इन कार्यक्रमों ने, जिनमें श्वसन तकनीकें, ध्यान, योग और दैनिक जीवन के लिए व्यावहारिक ज्ञान है, इस प्रकार के ज्ञान ने विश्व के लाखों लोगों को अपने जीवन को पूर्ण रूप से रूपांतरित करने में सहायता की है। गलगोटियास विश्वविद्यालय में शुरू हुऐ इस चार दिवसीय कार्यक्रम में आज के पहले दिन विश्वविद्यालय के फैकल्टी-मेम्बरों को सुदर्शन क्रिया और श्वासायाम तकनीक के बारे में बताया गया। “आर्ट ऑफ़ लिविंग” से श्री अखिलेश परमाणु जी (सीनियर फैकल्टी),/ साधना जी, सविता शर्मा जी और राजेश मथुर जी एवम् नीति श्रीवास्तव और श्रुति जी ने फैकल्टी डेवलपमेंट के सभी सत्र लिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक ही छात्रों के हृदय और मन तक पहुँचने का एकमात्र माध्यम होते हैं और “आर्ट ऑफ़ लिविंग” इस दिशा में योगदान करने की क्षमता रखता है, जिसके माध्यम से शिक्षकों को मानसिक तनाव को कम करने और शिक्षात्मक उत्कृष्टता के लिए ऊर्जा स्तर में सुधार करना सीखने में मदद मिल सकती है। गलगोटियास विश्वविद्यालय के सीईओ डा० ध्रुव गलगोटिया ने कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के अद्भुत कार्यक्रम समस्त मानवता के लिये बहुत ही हितकारी और कल्याणकारी हैं।

“आर्ट ऑफ लिविंग” जीवन को पूर्णता से जीने के एक सिद्धांत या दर्शन से कहीं अधिक है। यह संस्थान होने के बजाय एक अभियान अधिक है। इसका मुख्य उद्देश्य अपने भीतर शांति को पाना और हमारे समाज के विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं, धर्मों और राष्ट्रीयता के लोगों को एक करना है और हम सबको यह याद दिलाना है कि हमारा एक ही लक्ष्य है,सब जगह मानव जीवन का उत्थान करना।

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