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फेस वार्ता। बी बी शर्मा

गलगोटियास विश्वविद्यालय में मेरी माटी मेरा देश अभियान की अमृत कलश यात्रा का आज दिल्ली में समापन हुआ। मेरी माटी मेरा देश के समापन कार्यक्रम में आज गलगोटिया विश्वविद्यालय के एन एस एस यूनिट के 400 छात्र भी पहुँचे। गलगोटिया विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों ने “ मेरी माटी मेरा देश” कार्यक्रम के समापन का सीधा प्रसारण साँय 5-6 बजे तक गलगोटियाज विश्वविद्यालय के प्रांगण में विवेकानंद आडिटोरियम में बैठकर देखा। आज़ादी के अमृत महोत्सव का समापन। देश की अमृत वाटिका में 6 लाख गाँवों की मिट्टी हुई इक्कठी।

अमृत महोत्सव स्मारक से शहीदों को दी गयी श्रद्धांजलि। राष्ट्रीय एकता दिवस पर विकसित भारत का लिया संकल्प। मेरा युवा भारत से राष्ट्र से जुड़ेंगे नौजवान। देश भर से 25000 कलश यात्रा दिल्ली में पहुँचे। आत्मनिर्भरता और साँस्कृतिक गौरव से जुड़े थे ये सभी अभियान। देश के 36 सूबे से आये थे यात्रा कलश। जल जीवन और स्वास्थ्य से जुडे थे ये सभी अभियान। इस कार्यक्रम का समापन नयी दिल्ली के “कर्तव्य पथ” से लाइव प्रसारण के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री जी ने किया था। जिसमें गलगोटियास विश्वविद्यालय के एन एस एस समन्वय समिति की समन्वयक प्रांजलि मिश्रा ने बताया कि गलगोटियाज विश्वविद्यालय के एन एस एस की पाँच यूनिट्स के लगभग 400 छात्र-छात्राओं दिल्ली जाकर सीधे इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया है। गलगोटियास विश्वविद्यालय के चॉसलर सुनील गलगोटिया ने प्रधानमंत्री की पहल को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम “मेरी माटी मेरा देश अभियान” एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम है यह कार्यक्रम उन वीरों के सम्मान में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम का सद उद्देश्य उन बहादुर बलिदानियों को श्रद्धांजलि देना था जिन्होंने हमारे देश की रक्षा की खातिर अपने प्राणों को न्योछावर करके सर्वोच्च बलिदान दिया है।गलगोटियाज विश्वविद्यालय के सीईओ डा० ध्रुव गलगोटिया ने बताया कि इस प्रकार के बहुत ही महत्वपूर्ण कार्यक्रम सम्मस्त मानव जाति के भीतर देशभक्ति और एकजुटता की भावना पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, साथ ही निस्वार्थता, सेवा और प्राकृतिक पर्यावरण की जिम्मेदार देखभाल जैसे महत्वपूर्ण मूल्यों को भी बढ़ावा देते हैं। गलगोटियास विश्वविद्यालय की डायरेक्टर ऑपरेशन आराधना गलगोटिया ने इस अवसर पर कहा कि हम ह्रदय से अपने माननीय प्रधानमंत्री जी को नमन करते है हैं और इस प्रकार के आयोजन हमारे सशस्त्र बलों के सदस्यों द्वारा किए गए बलिदानों के प्रति सराहना दिखाने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी है।

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