एमिटी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अपने शोध कार्य और नवाचार के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है।

फेस वार्ता। भारत भूषण शर्मा

नोएडा

एमिटी विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक हुई विश्व वैज्ञानिकों की सूची के शीर्ष 2 प्रतिशत में शामिल

विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान के क्षेत्र में लगातार दो बार डा निधि चौहान का चयन किया गया।

एमिटी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अपने शोध कार्य और नवाचार के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है, इसी क्रम में एक और उपलब्धि हासिल करते हुए एमिटी विश्वविद्यालय उत्तरप्रदेश के एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ नैनोटेक्नोलॉजी की सहायक प्रोफेसर डा निधि चौहान को स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की विश्व वैज्ञानिकांें की सूची में र्शीष 2 प्रतिशत में शामिल किया है। डॉ निधि चौहान, बायोमेडिकल एप्लीकेशन के नैनोटेक्नोलॉजी एवं सेसिंग टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में प्रतिष्ठित और समर्पित शोधकर्ता है। इस अवसर पर एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान और एमिटी विश्वविद्यालय उत्तरप्रदेश के चांसलर डा अतुल चौहान ने डा निधि चौहान को बधाई दी।

एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डा अशोक कुमार चौहान ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें डा निधि चौहान की उपलब्धि पर बेहद गर्व है आज वो विश्व वैज्ञानिकांें की सूची में र्शीष 2 प्रतिशत में शामिल है। एमिटी सदैव शिक्षकों और छात्रों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है और हर संभव सहायता प्रदान करता है जिसके फलस्वरूप हमारे शिक्षक और छात्र विभिन्न राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय मंचो पर हमारा प्रतिनिधित्व करते है और विभिन्न क्षेत्रों में प्रशंसा, पुरस्कार और खिताब जीतकर हमें गौरवान्वित करते रहते है।

विदित हो कि विश्व वैज्ञानिकांें की सूची यूएसए के स्नैटफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन आयोनिडिस द्वारा तैयार की गई है और जिसे नीदरलैंड की कंपनी एल्सेवियर बीवी द्वारा प्रकाशित की गई है। चयन समिति द्वारो कैरियर के बृहद आंकडों और एक साल के प्रभाव के आधार पर विश्व भर से शोधकर्ताओं को सूचीबद्ध किया गया। इस प्रतिष्ठत सूची में एच इंडेक्स, उद्धरण, सह लेखन समायोजन, एचएम इंडेक्स, और अन्य डेटा बेस के आधार पर जानकारी को मानकीकृत किया। इस प्रतिष्ठित सूची में विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान के क्षेत्र में लगातार दो बार डा निधि चौहान का चयन किया गया। पीएचडी गोल्ड मेडलिस्ट और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा शकंुतला अमीर चंद अवार्ड से सम्मानित डा निधि पिछले 10 सालों से इस क्षेत्र में काम कर रही है। उन्होनें उच्च अंतराष्ट्रीय पत्रिकाओं में 100 से अधिक शोध लेख प्रकाशित किये है और 15 से अधिक पेटेंट इनके नाम है। इसके अतिरिक्त उन्होनें एच पाइलोरी का पता लगाने के लिए सेंसर विकास के क्षेत्र में प्रसिद्ध नोबल पुरस्कार विजेता प्रो बैरी जे मार्शल के साथ काम किया है।

वर्तमान में डा निधि, विज्ञान शिक्षा अनुसंधान बोर्ड, जैव प्रौद्योगिकी विभाग और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वास वित्त पोषित कई परियोजनाओं में प्रधान अन्वेषक के रूप में भूमिका निभा रही है। इसके अतिरिक्त वे अमेरिकन केमिकल सोसाइटी, सोसाइटी ऑफ बायोलॉजिकल्स केमिस्ट्स, और द इंडियन संाइस कांग्रेस एसोसिएशन कोलकाता की सक्रिय सदस्य है। उनकी रूचि के क्षेत्र में नवजात सेप्सिस, कैंसर, मधुमेह और रेक्रीएशनल दवाओं का पता लगाने के लिए ऑन स्पॉट सेंसर का निर्माण शामिल है।


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