महामारी के दौरान स्वंय को रोग से बचाने के लिए शारीरिक और मानसिक स्वस्थता का होना आवश्यक है: डा (श्रीमती) बलविंदर शुक्ला ।

फेस वार्ता, भारत भूषण शर्मा:-


एमिटी विश्वविद्यालय में महामारी के दौरान तनाव और चिंता का प्रबंधन विषय पर पर पांच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
महामारी के दौरान स्वंय को रोग से बचाने के लिए शारीरिक और मानसिक स्वस्थता का होना आवश्यक है। छात्रों और शिक्षकों को कोरोना महामारी के दौरान तनाव और चिंता से मुक्त रखने और उनका प्रबंधन करने के जागरूक करने के लिए एमिटी सेंटर फाॅर गाइडेंस एंड काउसलिंग द्वारा ‘‘ महामारी के दौरान तनाव और चिंता का प्रबंधन’’ विषय पर मई 03 से 07 तक पांच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इस पांच दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ एमिटी विश्वविद्यालय उत्तरप्रदेश की वाइस चांसलर डा (श्रीमती) बलविंदर शुक्ला, एमिटी विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश के वाइस चासंलर लेफ्ट जनरल वी के शर्मा और एमिटी सेंटर फाॅर गाइडेंस एंड काउसलिंग की प्रमुख डा हरमिंदर कौर गुजराल द्वारा किया गया। इस कार्यशाला में विभिन्न मनोवैज्ञानिकों, परामर्शकताओं, विशेषज्ञों आदि द्वारा जानकारी प्रदान की जायेगी।

महामारी के दौरान तनाव और चिंता का प्रबंधन विषय पर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ एमिटी विश्वविद्यालय उत्तरप्रदेश की वाइस चांसलर डा (श्रीमती) बलविंदर शुक्ला ने कहा कि एमिटी विश्वविद्यालय में कोरोना के दौरान छात्रों और अभिभावकों के लिए 24 घंटे काउसलिंग सेवा संचालित की जा रही जिससे छात्र आॅनलाइन शिक्षण के साथ मन में उठ रहे प्रश्नों, विचारों और समस्याओं को भी साझा कर सके। इस दौरान छात्रों के मस्तिष्क में आ रहे शिक्षण, भविष्य, रोजगार, व्यापार, परीक्षा और पाठयक्रम से जुड़े प्रश्नों का समाधान किया गया। अगर पहल करते हुए छात्रों की चिंताओं और तनाव को प्रारंभिक स्तर में समाधान कर दिया जाये तो छात्रों का विकास और बेहतर तरीके से होता है।

एमिटी विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश के वाइस चासंलर लेफ्ट जनरल वी के शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि बिना तनाव के जीवन संभव नही है। कुछ तनाव जीवन में लक्ष्यों को हासिल करने में सहायक होते है वही कुछ शरीर और मानसिक स्थिती में असंतुलन पैदा करते है। जीवन में विकास के लिए ज्ञान का साहस, शरीर का साहस और मानसिक साहस का होना आवश्यक है। आज के अनिश्चित दौर में हर व्यक्ति संर्घष कर रहा है और संर्घष में विजयी रहने के लिए शारीरिक और मानिसक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है।

एमिटी सेंटर फाॅर गाइडेंस एंड काउसलिंग की प्रमुख डा हरमिंदर कौर गुजराल ने स्वागत करते हुए कहा कि इस पांच दिवसीय कार्यशाला का उददेश्य छात्रो ंको तनाव, चिंता और मानसिक हलचल की गतिशीलता से अवगत करना है जो उनके रोजमर्रा के जीवन में व्याप्त है उन्हे पहचानने में सहायता करना है। अउत्पादीत चिंता से मुक्त करना और तर्कहीन एवं तर्कसंगत विचारों को पहचानने में सहायता भी करना है। छात्रों को स्क्रीन समय, आॅनलाइन कक्षाओं और परीक्षा प्रबंधन के प्रति जागरूक करना है।

इस पांच दिवसीय कार्यशाला कं अंर्तगत प्रथम सत्र के अंर्तगत एमिटी विश्वविद्यालय एसीजीसी की परामर्श मनोवैज्ञानिक सुश्री निकिता प्रभाकर भसीन ने ‘‘ तनाव एवं उसका प्रबंधन’’ पर जानकारी देते हुए कहा कि हमें सर्वप्रथम जानना है कि हम तनाव में है कि नही। हमारा व्यवहार सदैव तनाव के प्रबंधन में सहायक होता हैै। उन्होनें कहा कि तनाव आपके जीवन पर बृहद प्रभाव डालता है। तनाव दो प्रकार के होते है सकरात्मक तनाव और नकारात्मक तनाव। सकरात्मक तनाव से आपकी उत्पादकता बढ़ती है वही नकारात्मक तनाव से शारीरिक और मानसिक समस्या विकसित होती है। सकरात्मक तनाव से एकाग्रता में विकास, प्रदर्शन बेहतर, आंतरिक भाव को उर्जा, शरीर स्वस्थता आती है वही नकारात्मक तनाव से प्रोत्साहन में कमी, प्रभाव में कमी, शारीरिक और मानसिक परेशानी, व्यवहारिक मुद्दे आदि होते है। उन्होनें तनाव के लक्षणों को बताते हुए कहा कि अनिद्रा, मानसिक एकाग्रता में कमी, कार्य क्षमता में कमी, अवसाद, अत्यधिक क्रोध, पारिवारिक संर्घष, माइग्रेन, सरदर्द और पीठ दर्द आदि है। सुश्री भसीन ने तनाव के शारीरिक, मानसिक और व्यवहारिक लक्षणों को बताते हुए तनाव के निवारण जैसे समय प्रबंधन, तनाव के कारण जानने, तनाव प्रारंभ होने के लक्षणों से निदान, लचीले और मुकाबले की क्षमता में विकास, तनाव कम करने की तकनीक, योजना बनाने की आदत के संर्दभ में विस्तृत जानकारी प्रदान की।

द्वितीय सत्र में एमिटी इंस्टीटयूट आॅफ साइकोलाॅजी एडं एलाइड साइंसेस के डा रजत क्राती मि़त्रा ने महामारी में चिंता और उसका प्रबंधन पर जानकारी देते हुए कहा कि अन्य प्रजातियों की तुलना में मनुष्यों के अदंर अपनाने की क्षमता अधिक है जो हमें वर्षो से पृथ्वी पर जीवित रखी है। चिंता को समझने के लिए उसके कारक को समझना आवश्यक है। चिंता एक तकनीक है जो आपको स्वंय को समझने में सहायक होती है। महामारी के दौरान पांच मुख्य चिंताये, स्वंय के रोगी होने की, स्वंय के मृत्यु की, अस्पताल, बिस्तर, आॅक्सीजन, चिकित्स के ना मिलने की, अपनो के खोने की और अवसरों, रोजगार को खोने की आदि अधिक व्याप्त है। डा मित्रा ने महमारी के दौरान संक्रमण के चरण की, कोविड से हुए नुकसान के बारे में बताया।

तृतीय सत्र में एमिटी विश्वविद्यालय – एसीजीसी की परामर्श मनोवैज्ञानिक डा अलका शर्मा ने ‘‘ पैनिक अटैक और उसके लक्षणों’’ पर और एमिटी सेंटर फाॅर गाइडेंस एंड काउसलिंग कंसोरियम सदस्य डा जयदीप कौर ने ‘‘ महामारी के समय लचीलता का विकास’’ पर जानकारी प्रदान की।

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