सम्मान, आनंद और उदारता” विषय पर परिचर्चा सत्र का आयोजन

फेस वार्ता। भारत भूषण शर्मा :-

एमिटी वूमेन हेल्प डेस्क द्वारा ‘‘ उपलब्धि हासिल करना – सम्मान, आनंद और उदारता” विषय पर परिचर्चा सत्र का आयोजन

नोएडा:- एमिटी वूमेन हेल्प डेस्क के तत्वाधान में एमिटी विश्वविद्यालय में अंर्तराष्ट्रीय महिला सप्ताह 2021 को आयोजन मार्च 01 से मार्च 10 तक किया जा रहा है। इसी क्रम में संयुक्त राष्ट्र के थीम पर ध्यान केन्द्रीत करते अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में आज ‘‘ उपलब्धि हासिल करना – सम्मान, आनंद और उदारता’’ विषय पर आॅनलाइन परिचर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा सत्र का शुभारंभ कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने वाली और युद्ध क्षेत्र में उड़ान भरने वाली प्रथम महिला हैलीकाप्टर पायलेट फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना, समाजिक कार्य हेतु पद्मश्री से सम्मानित श्रीमती जनक पलटा मिगिलिगन, एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा (श्रीमती) बलविंदर शुक्ला और एमिटी वूमेन हेल्प डेस्क की चेयरपसरन प्रो निरूपमा प्रकाश द्वारा किया गया।

परिचर्चा सत्र का शुभारंभ कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने वाली और युद्ध क्षेत्र में उड़ान भरने वाली प्रथम महिला हैलीकाप्टर पायलेट, फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना ने संबोधित करते हुए कहा कि सम्मान, आनंद और उदारता तीनो शब्द आपस में जुड़े हुए है। तीनों शब्दों को उद्गम ज्ञान से होता है। उन्होनें छात्रों को कहा कि वर्तमान समय में आप अपने समय का उपयोग ज्ञान प्राप्त करने में करें जो आपको जीवन में आगे बढ़ने और लक्ष्यों को हासिल करने में सहायक होगा। आज का युवा पूरी से प्रोत्साहित है बस उन्हे मार्गदर्शन और सहयोग की सहायता है। फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना ने छात्रों से कहा कि सदैव प्रोत्साहित रहें, कड़ी मेहनत करें और स्वंय में विश्वास रखे। अपने सपनों को पूरा करने का प्रयास करते रहें। उन्होनें कहा कि जीवन का मूल मंत्र है हार ना मानें, चाहे जो भी मुश्किलें आये। क्षमता और कौशल के साथ जीवन में सकरात्मक दृष्टिकोण भी आवश्यक है। इस दौरान उन्होनें अपने निजी जीवन के क्षणों जैसे प्रशिक्षण, पारिवारिक सहयोग और कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने का अवसर के अनुभव के बारे में बताया।

समाजिक कार्य हेतु पद्मश्री से सम्मानित श्रीमती जनक पलटा मिगिलिगन ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आज जो मै बोल रही हूं उसके पीछे मेरे परिवार का सहयोग है। स्थायी विकास जीवन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। जीवन रूपी पक्षी तभी आकाश में विकास की यात्रा तय कर सकता है जब उसके पति और पत्नी रूपी पंख बराबर हो। स्थायी विकास के परिभाषा को समझ कर अपनी जिम्मेदारी लेनी होगी। हम नारे लगाते रहे लेकिन कुछ किया नही। आत्मनिर्भर बनने के लिए भारतीय स्थायी आत्मनिर्भर व्यक्ति होने चाहिए। हमें स्थायी विकास विकल्प को समझना होगा जिसमे सर्वप्रथम महिला और पुरूषों के मध्य अंतर को समाप्त करना होगा। लैंगिक भेदभाव से पहले इंसान बनें और बच्चों को अच्छा इंसान बनने के लिए प्रेरित करें। लड़कियों को सुरक्षित बनाने से पहले लड़कों को महिलाओं और लड़कियों का आदर करना सीखायें। रिवाज सदैव महिलाओं के लिए बने है जबकी रिवाज लड़के और लड़कियां दोनो के लिए होना चाहिए। श्रीमती मिगिलिगन ने कहा कि स्वंय पर भरोसा करें और आपस में विश्वास और प्रेम विकसित करें। हमारे पास मृत्यु का विकल्प नही है लेकिन जीवन को किस तरह जीना है इसका विकल्प है।

एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा (श्रीमती) बलविंदर शुक्ला ने संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृती के वैभवशाली विरासत सदैव महिला केन्द्रीत रही है जिसमें हम माॅं सरस्वती, माॅ लक्ष्मी, माॅ दुर्गा और माॅ काली की अराधना करते है क्योकी विश्व के संचालन हेतु ज्ञान, संपत्ती, वैभव, सुरक्षा साहस आवश्यक है और भारतीय परंपरा में सदैव हम इसका अनुसरण करते आये है। विकास के क्रम में परिस्थितियां बदलती गई और आज हमें महिला सशक्तीकरण की बात करनी पड़ रही है। कही तो कुछ ठीक नही रहा या गलत हुआ जिससे स्थितीयों में इस प्रकार का परिवर्तन आ गया है। कई कारक रहे जिसमें महिलाओं का महिलाओं का सहयोग ना करना भी एक प्रमुख कारण रहा। लैंगिक विविधता के साथ अन्य संस्कृतियों, कार्यो का सम्मान करें और लोगों से समान व्यवहार करें। एमिटी सदैव छात्रों को लैंगिक समानता के मुद्दे पर जागरूक करता है और उन्हे समान सुविधायें प्रदान करके विकास के समान अवसर प्रदान करता है। अभिभावक और शिक्षको छात्रों में मूल्यों को पोषित कर अच्छे समाज का निर्माण कर सकते है। उन्होनें छात्रों से कहा कि सदैव स्वंय पर विश्वास रखें और असफलता से घबरायें नही।

एमिटी वूमेन हेल्प डेस्क की चेयरपसरन प्रो निरूपमा प्रकाश ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस एमिटी विश्वविद्यालय में अंर्तराष्ट्रीय महिला सप्ताह 2021 के अंर्तगत महिलाओं की उपलब्धियों, सशक्तीकरण और जुड़े मुद्दे पर विभिन्न कार्यक्रमों जैसे वेबिनार, वाद विवाद, निंबध लेखन, पोस्टर निर्माण, परिचर्चा सत्र का आयोजन किया जायेगा। लैंिगक असामनता और भेदभाव को समाप्त करने के लिए समाज, देश और विश्व के सभी खाताधारकों को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होनें कहा कि परिचर्चा सत्र में विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा प्राप्त जानकारी छात्रों सहित हम सभी के लिए लाभप्रद होगी।

इस परिचर्चा सत्र के अंर्तगत तीन सत्रों का आयोजन किया गया जिसके अंर्तगत प्रथम सत्र ‘‘ उदारता की खुशी का अनुभव – एक बेहतर समाज के लिए हाथ बढ़ाए’’ विषय पर परिचर्चा की गई जिसमें यूके के अंर्तराष्ट्रीय विकास विभाग के नेपाल कार्यालय की समाजिक विकास अधिकारी डा करूण ओंटा, मुबंई के टाटा इंस्टीटयूट आॅफ सोशियल साइंसेस की डा शेवली कुमार, नाइफा मारूफ फांउडेशन के संस्थापक और सीईओ डा मारूफ इस्लाम, आॅल इंडिया वूमेन डेवलपमेंट एंड ट्रेनिंग सोसाइटी की अध्यक्ष डा बिंदु सिंह, डाबर इंडिया के आयुरवेट की प्रधान वैज्ञानिक डा दीप्ती राय ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर एमिटी इंस्टीटयूट आॅफ साइकोलाॅजी एंड एलाइड साइसेंस की निदेशिका डा रंजना भाटिया भी उपस्थित थी। इस कार्यक्रम के अंर्तगत ‘‘महिला उद्यमिता और नेतृत्व – नई इबारत’’ विषय और ‘‘परिवर्तन के लिए चुनौतियों को आत्मसात करें – समानता के लिए कारवाई’’ विषय पर सत्रों का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर छात्राओं द्वारा संास्कृति प्रस्तुती प्रदान की गई जिसमें छात्राओं द्वारा गीत और नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर एमिटी इंस्टीटयूट आॅफ एजुकेशन की प्रमुख डा अलका मुदगल, एमिटी स्कूल आॅफ कम्यूनिकेशन की संयुक्त प्रमुख डा पारूल मजूमदार आदि लोग उपस्थित थे।


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