जीएनआईओटी प्रवंधन अध्ययन संस्थान में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन।

फेस वार्ता :-

जीएनआईओटी प्रवंधन अध्ययन संस्थान में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

राष्ट्रीय संगोष्ठी में १६ राज्यों से १४२ शोधार्थियों ने विभिन्न विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये,

ग्रेटर नोएडा- : जीएनआईओटी प्रवंधन अध्ययन संस्थान में रिजिलिएंस, रीइंवेनसं, और रीबिल्डिंग टूवार्डस न्यू नॉर्मल विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया । अपने स्वागत भाषण में संस्थान के निदेशक ने सतत विकास हेतु शोध पर बल देते हुए ऐसे आयोजनों की महत्ता पर प्रकाश डाला । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर आर के खाण्डाल, पूर्व कुलपति अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय ने जन्म से अंत्येष्टि तक की परिकल्पना पर जोर देते हुए वर्तमान शिक्षा व्यवस्था एवं पाठ्यक्रमों के विकास हेतु नये विषयों पर शोधार्थियों को प्रोत्साहित किया ।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं आरएमएसआई के वाइस प्रेसिडेंट उपकार सिंह ने पुनः पुरानी व्यवस्था बनाने हेतु शोध की दिशा मे हो रहे कार्यों का बढ़चढ़ कर प्रसंशा की एवं यह बताया की नई व्यवस्था कैसे तकनीक का प्रयोग करके प्राचीन व्यवस्था की ओर वापस जा रहे हैं ।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में १६ राज्यों से १४२ शोधार्थियों ने विभिन्न विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये, शिक्षकों में मोहित सक्सेना, अनिरुध घोष, अमोल धर, जयंता चक्रवर्ती तथा शोधार्थियों में अंश शर्मा, सिमरन अरोड़ा, ऋषिका जैन, आकृति महाजन, दीप शर्मा, ज्योति देवी, कणिका सल्होत्रा, रुचि कौल को विभिन्न विषयों पर शोध हेतु विशेष प्रस्तुतकर्ता का पुरस्कार दिया गया ।

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में विशेष अतिथि एवं प्रमुख आईआईसीए- भारत सरकार ने सामाजिक एवं आर्थिक विकास हेतु सामाजिक ललीलेपन की आवश्यकता पर जोर देते हुए शोध के उद्देश्य, मूल्य निर्धारण एवं सभ्यता के बीच सामंजस्य बनाये रखने की बात की ।

संगोष्ठी का संचालन संस्थान की अधिष्ठाता डॉ रुचि रायत ने किया तथा अंत में संगोष्ठी संयोजक प्रोफेसर मयंक पांडेय ने विशेष शोध पत्र हेतु बधाई दी तथा सभी को सफल आयोजन हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया । इस अवसर पर शालिनी शर्मा, प्रदीप वर्मा, मुदित तोमर, सुधा पान्डेय आदि उपस्थित रहे ।

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