ग्रेटर नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज में “अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सहयोग से अंग दान जागरूकता शिविर” का आयोजन।

ग्रेटर नोएडा

एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद अपने अंग दान करने के निर्णय से 8 लोगों की जान बचाई जा सकती है: डॉ सविता मोहन


ग्रेटर नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज में- आज दिनांक 11 अप्रैल, 2022 को “अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सहयोग से अंग दान जागरूकता शिविर” का आयोजन किया गया
प्रिंसिपल, ग्रेटर नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज डॉ सविता मोहन ने कहा एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद अपने अंग दान करने के निर्णय से 8 लोगों की जान बचाई जा सकती है (8 अंगों को ब्रेन डेड व्यक्ति से काटा जा सकता है और 8 अलग-अलग लोगों में प्रत्यारोपित किया जा सकता है)।

जो लोग अशिक्षित या आंशिक रूप से शिक्षित हैं वे अंग दान करना बुद्धिमानी भरा कदम नहीं मानते हैं। इसलिए यह उन लोगों की ज़िम्मेदारी बन जाती है जो इस तरह की प्रक्रियाओं से अवगत हैं और लोगों के दिमाग को बदलकर हमारे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।निश्चित रूप से हर व्यक्ति, जो मानवता की ओर दयालु है और किसी और को उसके दर्द से सहानुभूति दे सकता है, वह मौत के बाद अपने अंगों को दान करने की कोशिश कर सकता है और उन लोगों को जीवन का उपहार दे सकते हैं जिन्हें अंगों की सबसे अधिक आवश्यकता है।
एम्स से आये हुए ऑर्गन ट्रांप्लांट कोऑर्डिनेटर श्री बलराम जी ने सभी को सम्बोधित करते हुए कहा कि पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से दुनिया कोविड-19 की महामारी से जूझ रही है। कोरोना ने दुनियाभर में अंगदान की प्रक्रिया को भी काफी हद तक प्रभावित किया है।

अंगदान एक महादान है। वर्तमान समय में भारत में 2.5 लाख से ज्यादा मरीज गुर्दे की बीमारी तथा लगभग 2 लाख से ज्यादा लोग यकृत की बीमारी से पीड़ित है। भारत में प्रतिवर्ष केवल 1000 यकृत तथा लगभग 4000 गुर्दा प्रत्यारोपण होते हैं। उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि हर साल लाखों मरीजों की पर्याप्त अंगों की कमी की वजह से मृत्यु हो जाती है। उन्होंने कहा कि नेत्रदान महादान है। इसका अहसास यदि लोगों को हो जाए तो उन तमाम लोगों के जीवन में उजाला हो जाएगा।
सिस्टर इंचार्ज एवं ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर , नेशनल आई बैंक श्रीमती कमलेश सैनी जी ने ने लोगों को अंगदान के संबंध में भ्रांतियों और इसकी आवश्यकता के बारे में जानकारी दी. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अंगदान के बारे में लोगों के बीच फैली भ्रांतियों को दूर करें और सभी को अंगदान के लिए प्रेरित करें.अंग दान निस्संदेह मानवीय कार्यों में से एक है लेकिन बहुत से लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं और इसके अतिरिक्त इसके साथ विभिन्न बुराइयां भी जुड़ी हैं। तो इंसान के रूप में क्या यह हर किसी का कर्तव्य नहीं है की उनकी मृत्यु के बाद उन्हें अपने अंगों को दान करने की इजाजत दी जाए?
ग्रेटर नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज मे पहली बार आयोजित अंग दान जागरूकता शिविर मे सभी शिक्षक एवं छात्रों सहित 150 से अधिक लोगों को अंगदान के लिए जागरूक किया गया जिनमे से लगभग 70 लोगों ने अंगदान के लिए रजिस्ट्रेशन भी कराया I
कार्यक्रम की मॉडरेटर प्रोफ. प्रियंका राय रही उन्होंने कहा कि आपको यह जानकार बड़ा आश्चर्य होगा कि कुछ अंग ऐसे होते हैं जिन्हें दानदाता केवल जीवित रह कर ही दान कर सकता है और कुछ अंग ऐसे होते हैं जिन्हें केवल तब ही प्रत्यारोपित किया जा सकता है जब दाता की मृत्यु हो जाती है। आज ऑर्गन दाता के रूप में पंजीकृत होने के बाद सभी को एक दाता कार्ड प्राप्त हुआ है
शिविर क़े समापन मे डीन-जिप्स डॉ अविजित डे ने आये सभी वक्ताओं का आभार व्यक्त किया , उन्होंने कहा कि हर किसी को अंग दान क़े लिए आगे आना चाहिए और इस समस्या की ओर एकजुट होना चाहिए तथा यह समझना चाहिए कि ये ईमानदार प्रयास हमारे समाज पर एक बड़ा सकारात्मक प्रभाव कैसे डाल सकते हैं।

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