अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर समर्पित कविता।


नारी सृजना है सृष्टि की,
जीती हर किरदारों में।
अस्तित्व करो ना लघुतम उसका,
ना बांधों संकीर्ण विचारों में।
जाग उठी अब प्रहरी बनकर,
स -शक्ती के अधिकारों में।
स्वर है एक धरा पर उसका,
देश धरम परिवारों में।
रहे कहीं भी इस धरती पर,
जीती हर किरदारों में।।
शास्त्र पढ़े हैं, शस्त्र गढे हैं।
तो आवाज उठाना बाकी है।
जिन आंखों में प्रेम भरा था,
वो आंख दिखाना बाकी है।
दीन धर्म की बातों को अब,
फिर से बतलाना बाकी है।।
विद्या छोड़ी शिक्षा सीखी,
खुद को समझाना बाकी है।।
धर्म ध्वजा की रक्षा वाला
वो मिजाज़ बताना बाकी है।।

सभी नारी शक्ति को समर्पित

योगेश प्रताप सिंह ‘सच’
असिस्टेंट् प्रोफेसर (शिक्षा संकाय)

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